नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया है कि आरक्षित वर्ग के वे अभ्यर्थी, जो जनरल/ओपन कैटेगरी की कट-ऑफ से अधिक अंक हासिल करते हैं और किसी तरह की विशेष छूट या रियायत का लाभ नहीं लेते, उन्हें केवल उनकी आरक्षित श्रेणी तक सीमित नहीं किया जा सकता। ऐसे अभ्यर्थियों को शॉर्टलिस्टिंग के चरण में भी ओपन कैटेगरी में शामिल करना अनिवार्य होगा।
यह मामला अगस्त 2022 में राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा शुरू की गई भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसमें जूनियर ज्यूडिशियल असिस्टेंट और क्लर्क ग्रेड-II के कुल 2,756 पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। चयन प्रक्रिया में 300 अंकों की लिखित परीक्षा और 100 अंकों की कंप्यूटर आधारित टाइपिंग परीक्षा शामिल थी। भर्ती नियमों के अनुसार, प्रत्येक श्रेणी में उपलब्ध रिक्तियों के मुकाबले पांच गुना अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा के आधार पर टाइपिंग टेस्ट के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाना था।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को मेरिट और समानता के सिद्धांतों को मजबूत करने वाला माना जा रहा है।